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बठिंडा व रोपड के थर्मल प्लांट को बंद करना पंजाब सरकार की नाकामी है।

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बठिंडा व रोपड के थर्मल प्लांट को बंद करना पंजाब सरकार की नाकामी है। कैप्टेन सरकार आपनी कमज़ोरियों को छुपाने के लिये केंद्र सरकार पर दोष लगा रही है। हक़ीक़त है कि केंद्र की और से थर्मल प्लांट बंद करने के लिए कोई निर्देश या एडवाइजरी जारी नहीं की है। गुरु नानक देव थर्मल प्लांट (जीएनडीपी) बंद होने से करोड़ों रुपये की पब्लिक संपत्ति सरेआम बर्बाद हो जाएगी। 2200 एकड़ रकबे में बने और हर रोज एक करोड़ यूनिट बिजली पैदा करने की क्षमता वाले प्लांट पर साल-2005-06 और साल-2012 से लेकर 2014 तक प्लांट के चारों ही यूनिटों का नवीनीकरण करने के लिए सरकार ने 716 करोड़ रुपये खर्च किए थे। प्लांट में 2300 के करीब कच्चे-पक्के कर्मचारी काम कर रहे हैं।सरकार ने निजी थर्मल प्लांटों को लाभ पहुंचाने के मकसद से साल-2022 तक राज्य के सभी सरकारी थर्मल प्लांट बंद करने का मन बनाया हुआ है। करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद जीएनडीपी की समर्था, गुणवत्ता और मियाद में 15-20 साल का इजाफा हो चुका है। प्लांट बिल्कुल नए की तरह हो बन चुका है, जिसे बंद करना किसी मूर्खता से कम नहीं है।

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