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डॉ. अम्बेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र (डीएआईसी) का निर्माण

डॉ. अम्बेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र (डीएआईसी) का निर्माण लगभग 192 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से किया गया है। जनवरी 2018 तक निर्मित किए जाने वाले इस भवन का निर्माण कार्य निर्धारित निर्माण-तिथि से पहले ही पूरा किया जा चुका है। डीआईएसी की आधारशिला दिनांक 20.4.2015 को भारत के माननीय प्रधानमंत्री द्वारा रखी गई थी।
2. ​डीएआईसी का निर्माण 3.25 एकड़ में किया गया है और इसका निर्मित क्षेत्र 117830.59 वर्ग फुट है। डीआईएसी को एक उत्कृष्ट केंद्र में विकसित करने के लिए इस भवन को एक वृहत पुस्तकालय, तीन अत्याधुनिक सभागारों, बैठने की अलग-अलग क्षमता वाले तीन सम्मेलन कक्षों और प्रदर्शनी क्षेत्रों से सुसज्जित किया गया है।
3. ​डीएआईसी, आधुनिक और पारम्परिक वास्तुकला का एक अद्भुत नमूना है, जिसके बीचों-बीच केंद्र में सांची स्तूप तोरण है जो डॉ. अम्बेडकर का बौद्ध धर्म के प्रति अनुराग का प्रतीक है। इसमें चैत्य मेहराब बनाने के लिए लाल बलुआ पत्थर का इस्तेमाल किया गया है और चित्रवल्लरी से सुसज्जित है। खुले प्रांगण में ध्यान मुद्रा में भगवान बुद्ध की पत्थर की आठ फुट ऊंची मूर्ति स्थापित है। चैत्य मेहराब के सामने डॉ. अम्बेडकर की खड़ी मुद्रा वाली मूर्ति स्थापित है और प्रांगण में उनकी मूर्ति बैठी हुई मुद्रा में विराजमान है। यह भवन वास्तुकला का अद्वितीय नमूना है जिसके पश्चिमी कोने में 25 मीटर ऊंचा तांबे का अशोक स्तंभ है जो सार्वजनिक रूप से दृष्टव्य है।
4. ​इस भवन का केंद्रीय गुंबद पारदर्शी सामग्री से निर्मित है जिसमें 24 अरा बने हुए हैं जो राष्ट्रीय ध्वज का प्रतीक हैं। इस पारदर्शी गुंबद से दिनभर प्राकृतिक उजाला रहता है जिससे बिजली की बजत होती है।
5. ​ई-लाइब्रेरी में अंतर्राष्ट्रीय पुस्तकों से संपर्क होगा। विद्वान, अनुसंधानकर्ता और विद्यार्थी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुस्तकालयों की लगभग 2 लाख पुस्तकों और 70 हजार पत्र पत्रिकाओं को पढ़ सकेंगे। इस पुस्कालय में दृष्टि-बाधित व्यक्तियों के लिए ब्रेल अनुभाग भी होगा।
6. ​डीएआईसी में डॉ. अम्बेडकर सेंटर फार सोशियो-इकानामिक ट्रासफोर्मेशन (डीएआईसीएसईटी) होगा जो सामाजिक और आर्थिक अध्ययन के क्षेत्र अनुसंधान का एक उत्कृष्ट केंद्र होगा (यह माननीय प्रधानमंत्री जी के द्वारा उद्घाटन के समय घोषित किया जाएगा)। डीएआईसीएसईटी एक विशेषज्ञ समूह (थिंक टैंक) होगा जो समावेशी विकास और उत्थान पर ध्यान केंद्रित हुए सामाजिक-आर्थिक मामलों पर ध्यान देगा। इस केंद्र में परामर्शदात्री शाखा और मीडिया शाखा भी होगी। यह केंद्र क्षेत्रीय हस्तेक्षेपों का प्रस्ताव करेगा, परामर्श देगा, अनुसंधान रिपोर्टें, नीतिपरक संक्षिप्त लेखों को उपलब्ध कराएगा और कार्यशालाएं एवं सम्मेलन आयोजित करेगा।

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