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अब लोग पंजाब केसरी पड़ना पसंद नहीं करते तो इस मे मेरा क्या क़सूर ?

सभी मित्रों से निवेदन है कि मेरा मार्ग दर्शन करे कि मैं अब आगे क्या करं ? क्योंकि पंजाब केसरी अपनी घटीया हरकतों से बाज़ नहीं आ रहा । मेरी शराफ़त को मेरी कमज़ोरी समझने लगा है । मैं चुप हुँ तो इसका मतलब यह नहीं की डरता हुँ । मेरे ख़िलाफ़ एसी कहानियाँ लिख रहा है जिनका मेरा दूर दूर का भी नाता नहीं है। अब लोग पंजाब केसरी पड़ना पसंद नहीं करते तो इस मे मेरा क्या क़सूर ?

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